जानिए प्यार से रुका जा सकता है झुका नहीं जा सकता है
कड़वाहट और गलतफहमी किसी भी प्रेम को समाप्त जरूर करती है। प्यार दो प्रेमियों का हो या फिर खून के रिश्ते का, मन में अगर कड़वाहट है या फिर कोई गलतफहमी मन में घर कर गई है तो वो उस रिश्ते के विनाश का कारण एक दिन जरूर बनती है।
ज्यादातर प्यार करने वालों में ईगो की एक विशेष समस्या देखी जाती है साथ ही खुद को हावी करने की सोच भी एक गलत रूप में हक मानकर अपने पार्टनर पर थोपी जाती है।
ज्यादातर प्यार करने वालों में ईगो की एक विशेष समस्या देखी जाती है साथ ही खुद को हावी करने की सोच भी एक गलत रूप में हक मानकर अपने पार्टनर पर थोपी जाती है।

कई मायनों में यह हक तब बहुत प्यारा लगता है जबकि उस हक की मंशा पवित्र हो साथ ही जिस पर जताया जा रहा हो वो इसको अपने प्रति समर्पण माने।उस समर्पित भाव में झुकना ही प्यार की नींव को बहुत मजबूत करता है। पर ऐसा होता बहुत कम है। आज रिश्ते थोपे जाते हैं तो साथ में अहसान से उनको चलाने की कोशिशें की जाती हैं। बात-बात पर अपना किया उपक्रम दर्शाया जाता है, याद दिलाया जाता है।इसको प्यार नहीं माना जा सकता है क्योंकि प्यार तो एक अहसास होता है जो कि आत्मा के अंदर से खुद प्रेरित करता है।
प्यार पाना और प्यार देना कभी अहसान से नहीं होता है। प्यार एक जरूरत होती है जो कि मन और दिल के साथ मस्तिष्क की सोच के भी मिलने से उत्पन्न होती है। जिससे प्यार किया जाता है उसकी हर अच्छी या बुरी बातें आपको सम्मोहित भी करती हैं और उसकी निकटता आपको दुनिया का सबसे शानदार अहसास भी करवाती है।अगर आप प्यार करते हैं तो आपको झुकना आना बहुत जरूरी होता है। कई बार गलती या गलतफहमी में हम खुद को सुपर साबित करने और अपने साथी पर हावी होने पर खुद के अंदर खुशी या जीत का भाव महसूस करते हैं पर कभी यह भी सोचकर देखिए कि आपने जो किया वो आपके साथी के लिए कितना कष्टदायी हुआ।प्यार में झुक जाना महानता की निशानी होता है और जो ऐसा कर सकते हैं वही प्यार को सच्चाई की तरह निभा सकते हैं।
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