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सरकार की इस स्कीम के तहत गांवों व गरीबों को मिल रहा 50 किलो चावल, जानिए आगे

नरेन्द्र मोदी सरकार की पीएम गरीब कल्याण अनाज योजना  कोरोना संकट के दौरान गांवों व गरीबों की बड़ी मददगार बनकर उभरी है।


जिसके भी पास राशन कार्ड (Ration Card) है उसे खाने-पीने की परेशानी नहीं आने पा रही है। गांवों में इस वक्त हर परिवार में औसतन पांच लोग हैं। ऐसे परिवारों को सिर्फ 75 रुपये देकर हर माह 50 किलो चावल व एक किलो चना या उसकी दाल मिल रही है। संकटकाल में कई परिवार इसे बेचकर खाने-पीने की दूसरी चीजें भी खरीद रहे हैं।

बिहार जैसे चुनावी राज्यों में यह योजना भाजपा के लिए बड़ी मददगार बन सकती है। क्योंकि मुफ्त का राजनीतिशास्त्र हमेशा अच्छा साबित होता रहा है। योजना के तहत परिवार के हर मेम्बर के नाम पर प्रति माह पांच किलो चावल फ्री मिल रहा है। साथ ही प्रति मेम्बर पांच-पांच किलो चावल सिर्फ तीन रुपये किलो के हिसाब से मिल रहा है। परिवार में मेम्बर चाहे जितने हों पूरी यूनिट पर एक किलो दाल भी दी जा रही है।


डेढ़ लाख करोड़ रुपये आएगा खर्च-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 करोड़ गरीबों के लिए चल रही इस योजना को नवंबर तक बढ़ा दिया है। मार्च से नवंबर तक इस योजना पर करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। पूरा खर्च केन्द्र सरकार उठा रही है, लेकिन अन्न वितरण प्रदेश सरकारों द्वारा किया जा रहा है।

2 व 3 रुपये किलो है रेट -मार्केट में गेहूं की मूल्य 27 रुपये किलो है, जो राशन दुकानों के माध्यम से दो रुपये किलो की रियायती दर पर दिया जा रहा है। चावल औसतन 37 रुपये किलो है, लेकिन राशन की दुकानों के जरिए इसे तीन रुपये किलो की दर पर दिया जा रहा है।

राजनीति में बहुत ज्यादा कार्य आएगी स्कीम-बिहार चुनाव में भाजपा इसे बड़ा चुनावी हथियार बना सकती है। जब इसे नवंबर तक बढ़ाया गया था तब इसके आरोप भी लगे थे। बिहार में इस योजना के 8 करोड़ 71 लाख लाभ पाने वाले हैं। जब प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे नवंबर तक बढ़ाने का एलान किया तो उसके तुरंत बाद पश्च‍िम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने घोषणा की कि उनके प्रदेश में जून 2021 तक गरीबों को मुफ्त राशन दिया जाएगा। वहां 2021 में विधानसभा चुनाव होना है। भाजपा को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को सालाना 6000 रुपये देने से भी बहुत ज्यादा सियासी लाभ मिला है।

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