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कब है हनुमान जयंती, हनुमान जी को क्यों पसंद है सिंदूर जानिए राज

दोस्तों आज की खास पेशकश में हम आपके लिए लेकर आए हैं हनमानजी  की जयंती  से सम्बन्धित लेख तो शुरू करते हैं-

बजरंगबली बली के बारे में कहा जाता है कि वह सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी नाराज भी हो जाते हैं। हर साल चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस बार हनुमान जयंती 08 अप्रैल 2020 को है। आइए इस मौके पर बताते हैं बजरंगबली के बारे में कुछ ऐसी रोचक और अनसुनी बातें जिनके बारे में आपने शायद ही  कभी सुना होगा।



हनुमान जी को क्यों पसंद है सिंदूर 

बाल ब्रह्मचारी राम भक्त हनुमान को सिंदूर पसंद है और सिंदूर चढ़ाने से बजरंगबली जल्दी प्रसन्न होते हैं। मन की मुराद पूरी करते हैं। क्या आपको पता है कि हनुमानजी को सिंदूर क्यों पसंद है। इसके पीछे एक कहानी है-

रावण को मारकर राम जी सीता जी को लेकर अयोध्या आए थे उनके साथ उनके परम भक्त हनुमान भी आए थे। एक दिन हनुमान जी ने माता को अपने मांग में सिंदूर भरते हुए देखा और पूछा कि माता आखिर आप अपने मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं? माता ने बड़ी ही सरलता से कहा कि ऐसा करने से भगवान श्री राम खुश रहते हैं और साथ ही ऐसा करने से उनकी आयु में भी वृद्धि होती है।

 यह सुनते ही श्री रामजी के परम भक्त हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग लिया और ऐसे ही श्रीराम के सामने आ गए। ऐसी अवस्था में देखकर भगवान श्री राम जी आश्चर्य में पड़ गए तब हनुमान जी ने माता सीता की कही हुई बात कही और इसे जानने के बाद प्रभु श्रीराम के मन में हनुमान जी के लिए और प्रेम बढ़ गया। इसलिए हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए लोग सिंदूर का लेप उनकी मूर्ति पर लगता हैं। ऐसा करने से बजंगबली के साथ-साथ श्रीराम भी प्रसन्न होते हैं।




शादी भी हुई थी बाल ब्रह्मचारी हनुमान जी की-

हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं, यह बात सभी को पता हैं लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि हनुमान जी की शादी हुई थी। दरअसल, शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी ने सूर्य देवता को अपना गुरु बनाया था। हनुमान जी को सूर्य भगवान से 9 विद्याएं सीखनी थीं, जो सूर्य भगवान जानते थे। सूर्य भगवान ने उन्हें शुरू की 5 विद्याएं सिखा दीं, लेकिन बाकी 4 विद्या सिखाने के लिए उन्होंने विवाह करने को कहा, क्योंकि बाकी की विद्या केवल विवाहित को ही दी जा सकती थीं। अपने गुरु भगवान सूर्य की आज्ञा के अनुसार हनुमान शादी के लिए राजी हो गए लेकिन उन्हें कोई कन्या बिबाह के लिए नहीं मिली तभी भगवान सूर्य ने अपनी परम तेजस्वी पुत्री सुवर्चला से हनुमान को शादी करने की प्रस्ताव दिया। हनुमान और सुवर्चला की शादी हो गई। सुवर्चला परम तपस्वी थीं। शादी होने के बाद सुवर्चला तपस्या में मग्न हो गई। उधर हनुमान जी अपनी बाकी चार विद्याओं के ज्ञान को हासिल करने में लग गए। इस तरह से भगवान हनुमान की शादी जरूर हुई थी, मगर उनका ब्रह्मचर्य कभी नहीं टूटा।


मारुति से कैसे बने हनुमान

हनुमान जी जब छोटे थे तब एक दिन उनका ध्यान सूर्य पर गया और उन्होंने खेल खेल में सूर्य को  एक लाल मीठे फल की तरह समझा व सूर्य को देखते ही हनुमान जी सूर्य को खाने पहुंच गए। जैसे ही उन्होंने सूर्य को खाने के लिए अपना मुंह खोला, इंद्र देव ने मारुति पर वज्र प्रहार कर दिया। वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा और तब से ही मारुति  जी का नाम हनुमान पड़ गया।
किन्तु हनुमान जी श्री राम चन्द्र जी के परम् भक्त थे।

दोस्तो आप हमें कॉमेंट ओर फॉलो करके हनुमान जी के बारे में कोई भी रोचक जानकारी दे सकते हैं । जय हनुमान 

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