चाणक्य निति के अनुसार चरित्रहीन महिला की होती है ये पहचान
चाणक्य द्वारा रचित एक नीति ग्रंथ है,जिसमें जीवन को सुखमय और सफल बनाने के लिए उपयोगी सुझाव दिए गए हैं। इस ग्रंथ का मुख्य विषय मानव समाज को जीवन के हर एक पहलू की व्यवहारिक शिक्षा देना है। चाणक्य एक महान ज्ञानी थे, जिन्होंने अपनी नीतियों की बदौलत चंद्रगुप्त मौर्य को राजा की गद्दी पर बैठा दिया था।
जानिए चाणक्य की कुछ ऐसी महत्वपूर्ण नीतियां जो आपको जीवन के किसी न किसी मोड़ पर काम आ सकती है। आज हम आपको चरित्रहीन महिला के कुछ लक्षणों के बारे में बताएंगे। दोस्तों किसी भी व्यक्ति का कैरेक्टर दीपक की रोशनी जैसा होता है जो दूर-दूर तक प्रकाश फैलाता है। अच्छे चरित्र के लोगों से जीवन को नई राह और प्रेरणा मिलती है। हिंदू धर्म में एक ग्रंथ है मनुस्मृति जिसमें महिलाओं के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। जिससे उनकी पवित्रता बनी रहे और वह समाज में आदर प्राप्त कर सके, तो दोस्तों किसी महिला का चरित्र गिर जाए तो उसकी समाज में निंदा होती है अपमान होता है और चरित्रहीन महिला पशुओ तथा नरकीय जीवन से भी नीची होती है। चरित्रहिन महिला पापो में लगकर पशुता तथा नरको की तरफ जा रही होती है। ऐसी स्त्रियों का संघ भी पतन करने वाला होता है।
तो दोस्ती मनुस्मृति में कुछ स्लोक के माध्यम से बदचलन और अपवित्र महिलाओं के लक्षण बताए गए हैं। दोस्तों कहते हैं मदिरापान करने वाली, दुष्ट पुरुषों का संग करने वाली और पति के साथ ना रहने वाली, बिना किसी काम के इधर-उधर विचरण करने वाली, असमय एवं देर तक सोने वाली, अपना घर छोड़कर दूसरे के घर में रहने वाली एसी महिला चरित्रहिन होती हैं। शर्म और लज्जा नारी के आभूषण है। जब कोई महिला इनका त्याग कर देती है तो उसे अपयश का सामना करना पड़ता है। मदिरापान करने वाली महिलाएं परिवार और समाज में अपनी इज्जत खो देती है।
दुष्ट पुरुषों का संग करने वाली महिलाओं का पतन बहुत जल्दी हो जाता है। उनकी वजह से परिवार के अन्य महिलाओं को भी समाज में बुरी नजरों से देखा जाता है। दोस्तों बताते हैं कि पति के साथ ना वाली महिलाओं और उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब जाता है। विवाह उपरांत पति के साथ रहने पर ही महिला को समाज में उचित मान-सम्मान प्राप्त होता है। कहते हैं बिना किसी काम के इधर-उधर विचरण करने वाली महिला के चरित्र में दोष आ सकता है। विवाहित महिला ऐसे करे तो वह अपने ससुराल और मायके दोनों की इज्जत को धूमिल करती है। दोस्तों मनुस्मृति में बताया गया है कि असमय और देर तक सोने वाली महिलाएं अपने शरीर को नुकसान पहुंचाती है और साथ ही, पारिवारिक दायित्व ठीक से नहीं निभाती है।
इसलिए वह शारीरिक और मानसिक रुप से बीमार रहती है लास्ट में बताते हैं मनुस्मृति में बताया गया है कि पिता और पति यह दो घर महिलाओं के लिए उपयुक्त माने गए हैं अपना घर छोड़ दूसरे के घर में रहने वाली महिला के चरित्र में दोष आ सकता है किसी दूसरे के घर में जितने भी ऐसो आराम हो लेकिन दोस्तों जो सुख और अपनापन पिता और पति के घर में प्राप्त हो सकता है।
वह कहीं और नहीं मिलेगा तो दोस्तों यह थे मनुस्मृति के कुछ बताए गए विचार कुछ अनमोल ज्ञान जो स्त्रियों के बारे में बताया गया है कि स्त्रियां अगर ऐसा करती है तो वह चरित्रहीन होती है। दोस्तों अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो और आप इन बातों से सहमत हैं तो पोस्ट को लाइक जरुर करिएगा दोस्तों को शेयर करिएगा।



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