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सरकार ने किये 44 प्राइवेट कॉलेज बन्द और 1.5 तकनीकी शिक्षा की सीटें की कम

ऑल इंडिया टेक्निकल काउंसिल द्वारा भारत के 44 प्राइवेट कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। जिस में मुख्यता प्राइवेट कॉलेज से ही किए गए हैं। विद्यार्थियों और शिक्षकों का मानना है की प्राइवेट कॉलेजों ने तकनीकी शिक्षा का नाम दवा रखा है अर्थात महंगी फीस लेकर उच्च शिक्षा के नाम पर केवल डिग्री थमा दी जाती थी और छात्र सरकारी पैसे को तकनीकी विद्यालय के मालिकों के हाथ में थमा दे देना। 

कॉलेज एडमिशन के पहले ये बातें रखें ...
जिसकी वजह से ना ही भारत का विकास हो पा रहा था, ना ही तकनीकी ज्ञान भारत के छात्रों तक पहुंच पा रहा था। ऑल इंडिया टेक्निकल काउंसलिंग जो कि केंद्र द्वारा संचालित होती है। हर साल तकनीकी शिक्षा को प्रदान करने वाले प्राइवेट कॉलेजों को फ्लॉप देखकर उन्हें बंद कर देती है। पिछले साल करीब 29 कॉलेज बंद होने की खबर मीडिया द्वारा प्रदान की गई थी परंतु इस बार यह आंकड़ा 44 प्राइवेट कॉलेजों के आस पास पहुंच गया है। 

संस्थान द्वारा जांच करवाने पर यह पाया गया कि इन कॉलेजों में सीट तो है परंतु अच्छी शिक्षा ना होने के कारण कोई भी छात्र इन कॉलेजों में दाखिला लेना नहीं चाहता। जिसकी वजह से इन कॉलेज में पिछले कुछ वर्षों में सीटें खाली पड़ी रही इसीलिए टेक्निकल काउंसिल द्वारा कॉलेज का बंद करने का निर्णय लिया गया। इसी के साथ 54 खुलने की मंजूरी दी जा चुकी है। 

जिसमें ज्यादातर मैनेजमेंट के कॉलेज धीरे-धीरे बढ़ रहा है और मंजूरी प्राप्त करने वाले कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। टेक्निकल द्वारा पिछले साल 32 लाख छात्रों द्वारा तकनीकी शिक्षा में दाखिला लेने की सूचना प्राप्त थी परंतु इस साल 30 लाख छात्रों द्वारा ही दाखिला लिया गया इसी वजह से सीटों को खत्म करना ही उचित समझा गया है।

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