डोकलाम के बाद अब भारतीय व चीनी सेना आयी आमने सामने।
सैन्य सूत्रों के हवाले से पता चला है कि भारत ने दो विवादास्पद क्षेत्रों पैंगोंग त्सो और गलवां घाटी में अपनी सेना बढ़ा दी है, जहां चीनी सेना के करीब 2000 से 2500 सैनिक तंबू गाड़कर डेरा जमाए हुए हैं। गोपनीयता की शर्त पर एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने कहा, क्षेत्र में भारतीय सेना की ताकत चीनी सेना से बेहतर है।
गलवां घाटी में दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड के साथ भारतीय पोस्ट एएम120 समेत कई प्रमुख सीमा क्षेत्रों पर चीनी सैनिकों की उपस्थिति भारतीय सेना के लिए सबसे बड़ी चिंता है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डीएस हुड्डा ने कहा, यह गंभीर स्थिति है। यह सामान्य प्रकार का अपराध नहीं है। गलवां घाटी में यह स्थिति चिंताजनक इसलिए है क्योंकि यहां दोनों पक्षों के बीच पहले कोई बड़ा विवाद नहीं रहा है।
पिछले एक हफ्ते में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा कई हमलों की खबरें थीं। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। पिछले एक सप्ताह में, दोनों पक्षों के स्थानीय कमांडरों ने कम से कम पांच बैठकें कीं। इन बैठकों में भारतीय पक्ष ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा गलवान घाटी में क्षेत्रों में बड़ी संख्या में टेंट लगाने के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था। भारत इस क्षेत्र को अपनी सीमा में मानता है।
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