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सैकड़ो किलोमीटर दूर से अपनी बहन की रक्षा करने पूरी सेना के साथ आया था ये सख्स


सैकड़ों साल पहले जब मुगल सल्तनत भारत देश मे अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही थी।हुमायूं के नेतृत्व में मुगल शासन था।उस समय मेवाड़ मुगलों के आधीन नही था।मेवाड़ के राजा थे महाराणा सांगा।राणा सांगा और हुमायूं में बड़ी दुश्मनी थी।दोनो के बीच कई युद्ध हुए लेकिन हुमायूं मेवाड़ को जीत नही सका।





बाद में राणा सांगा की मृत्यु के बाद वहां की बागडोर संभाली उनकी रानी कर्णावती ने।कर्णावती एक सूझ बूझ वाली महिला थीं जो कि बहुत ही वीर और निडर थीं।उन्होंने राज्य को अच्छे से सम्भाला।




उस समय गुजरात का राजा था बहादुर शाह।उसे लगा कि मेवाड़ पर कब्जा करने का यह बेहतरीन मौका है।और उसने मेवाड़ पर हमला कर दिया।कर्णावती ने संकट के समय धैर्य नही खोया और दिल्ली के राजा हुमायूँ को एक खत भेजा।खत में उन्होंने मदद की बात कही और एक राखी भी भेजी।
लिखा कि मैं आपको अपना भाई मानती हूं।आज आपकी बहन संकट में है और आप इस रेशम के धागे को यदी आप अटूट मानते हो तो मेरी रक्षा करो।हुमायूँ खत पढ़कर बहुत ही भावुक हुआ।वो तुरन्त अपनी सेना लेकर मेवाड़ की ओर कूच किया।उधर बहादुर शाह मेवाड़ पहुंच चुका था और लड़ाई शुरू हो चुकी थी।






मेवाड़ की सेना बहुत कम थी और गुजरात के पास असीम सेना थी।मेवाड़ हार गया।रानी ने सोचा कि शायद हुमायूँ ने उसके बहन के रिश्ते को नही माना और रानी ने जौहर कर लिया।इधर कुछ समय बाद हुमायूँ सेना सहित मेवाड़ पहुंच गया।बहादुर शाह और हुमायूँ में भीषण युद्ध हुआ और अंत मे हुमायूँ की जीत हुई।



हुमायूँ जीत कर तुरन्त महल की ओर दौड़ा अपनी बहन से मिलने को।लेकिन अंदर जाकर वो स्तब्ध रह गया वहां उसकी बहन नही थी।वहां सिर्फ उसे राख मिली।हुमायूँ यह देखकर रो पड़ा।उसने मुंहबोले रिश्ते को निभाने के लिए सबकुछ लगा दिया लेकिन फिर भी वो अपनी बहन को बचा नही पाया।

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