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भगबान भोलेनाथ को अपने इस दुर्लभ कर्म से हुई त्रिनेत्र की प्राप्ति


पूर्व कलयुग  काल मे नारद मुनि ने भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के बीच हुई एक घटना के माध्यम से भगवान शिव के तीसरे नेत्र के बारे में बताया। नारद मुनि ने उस समय नारद स्मृति में बताया कि एक बार भगवान भोलेनाथ अपने निबास  कैलाश पर्वत पर एक ऋषियो की बहुत बड़ी  सभा को संबोधित कर रहे थे जिसमें देवता और अन्य मुनि आये हुए थे।





तभी सभा के बीच मे पार्वती माता ने मनोरंजन के लिए अपने हाथ से भगवान शिव के नेत्र बंद कर दिए। ऐसा करते ही तीनो लोकों में अंधकार छा गया। सभी जीव त्राहि त्राहि करने लगे। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो सूर्य का कोई अस्तित्व ही नही बचा है।




अपनी सृष्टि की यह दशा देखकर भोलेनाथ रह न सके और उन्होंने अपने माथे पर एक ज्योतिपुंज प्रकट किया जिसके द्वारा सृष्टि में फिर से प्रकाशित हो गया। जब माता पार्वती ने इसका रहस्य पूछा तो उन्होंने बताया कि यदि वो ऐसा न करते तो हमारी सृष्टि का विनाश हो जाता क्योकि भोलेनाथ के नेत्र ही इस सृष्टि के पालनहार है।



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