क्रोध मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है
प्रिय साथियों आज का विषय क्रोध के नकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है क्योंकि यह माना जाता है की मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन क्रोध ही होता है,अगर हम क्रोध में आकर कोई निर्णय लेते हैं तो अंत में हमे पछताना पड़ता है।
क्रोध में आकर मनुष्य अच्छे और बुरे का फर्क नहीं कर पाता है और वह कोई न कोई अपराध कर बैठता है,महर्षि दुर्वाषा का क्रोध इतिहास प्रसिद्ध है परंतु कुछ अवसर इस तरह के भी आए जब वह अपने क्रोध पर काबू पाने में सफल रहे और इतिहास की कुछ घटनाएँ होते -होते रह गई।कुछ लोगों को छोटी सी बात पर भी बहुत गुस्सा आ जाता है जो उनकी कमज़ोर मानसिक स्थिति को व्यक्त करता है,जो व्यक्ति अंदर से मजबूत होते है वह कभी अपने क्रोध को व्यक्त नही करते हैं और समय आने पर अपने मन की आवाज को बड़े मजबूती के साथ व्यक्त करते हैं।धीर और गंभीर इंसान उस पर्वत के समान धैर्य रखते हैं जो आँधी तूफ़ान को सह करके भी अपने जगह पर अटल रहता है और दूसरों को हवा और छाँव देता रहता है।क्रोध में मर्यादा का ध्यान नहीं होता है क्योंकि वह व्यक्ति को अंधा बना देता है और व्यक्ति का विवेक नष्ट हो जाता है,क्रोध पर काबू पाने के लिए कुछ बातों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है जैसे कि जब भी किसी व्यक्ति को क्रोध आए तो वह एक गिलास पानी का सेवन कर ले या फिर दस तक उलटी गिनती गिनना शुरू कर दे अपने आप क्रोध कम हो जाएगा और हमे अपने आप को सम्भालने का वक्त मिल जाएगा।खुश रहने के जीतने फायदे हैं उतने ही नुकसान क्रोध करने के है इसलिए मनुष्य को हमेशा खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए

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