क्यों रखा जाता है सकट चौथ व्रत (संकष्टी चतुर्थी व्रत) का व्रत क्या है इसका महत्व?
जानकारी के लिए बता दें की सकट चौथ व्रत को, संकष्टी चतुर्थी व्रत भी कहा जाता है. हिंदू धर्म में इसका अपना ही महत्व होता है. इस बार यह व्रत 31 जनवरी को पड़ रहा है|
हिंदू पंचांग की मानें तो माघ मास की संकष्टी चतुर्थी को तिलकुटा या माही चौथ व वक्रतुंडी चतुर्थी भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि जबतक चंद्र देव को अर्घ्य नहीं दें तो व्रत पूरा नहीं होता|
क्या है इसकी मान्यताएं
इस व्रत को रखने वालों के संतान दीर्घायु होते हैं.
संतान को लंबी उम्र की प्राप्ति होती है साथ ही साथ वे निरोग जीवन व्यतित करते हैं.
यही नहीं इस व्रत को करने वालों के ग्रह-नक्षत्र मजबूत स्थिति में होते है.
इस व्रत को करके आप अपने कुंडली में अशुभ प्रभावों को कम कर सकते हैं.
इस व्रत से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और मांगलिक कार्य भी होते हैं.
इस मामले के जानकारों की मानें तो इस पूजा से केतु के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है.
संकष्टी चतुर्थी के दिन ऐसे दें चंद्रमा को अर्घ्य
सूर्यास्त के बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व होता है. ऐसे में उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही व्रत तोड़ें. इसके लिए आपको शहद, रोली, चंदन और दूध की जरूरत पड़ेगी. व्रत तोड़ने के बाद महिलाओं का शकरकंदी खाने की परंपरा भी है|

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