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सकट चौथ के दिन भूलकर भी ना करें ये काम जानिए क्या करें, क्या ना करें, पढ़ें ये मंत्र

दोस्तों जैसा की आप सब जानते हैं की 31 जनवरी को सकट चौथ का व्रत रखा जायेगा लेकिन उससे पहले हम आपको बताना चाहेगे की आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं जिससे आपके व्रत में कोई कमी ना हो| 



आइये जानते हैं सकट चौथ के दिन नहीं करना चाहिए 

तुलसी- सकट चौथ के दिन भूलकर भी तुलसी को भगवान गणेश को ना चढ़ाएं. इससे भगवान गणेश नाराज हो सकते हैं. पूजा के दौरान व्रती महिलाएं गणेश भगवान को दुर्वा चढ़ाएं

कंद मूल का सेवन ना करें- शास्त्रों के अनुसार इस दिन जमीन के अंदर उगने वाले कंद मूल का सेवन नहीं करना चाहिए. यही वजह है कि इस दिन मूली, प्याज,चुकंदर और गाजर खाना मना होता है

शरीर पर ना पड़े पानी की छींटे- भगवान गणेश की पूजा के दौरान जब आप अर्घ्य दे रहे हो तो इस बात का खास ध्यान रखें कि अर्घ्य के जल के छींटे आपके पैर अथवा शरीर पर बिलकुल ना पड़ें.

चांद देखें बिना ना तोड़ें व्रत- सकट चौथ के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने पर ही व्रत पूर्ण माना जाता है. इसलिए चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना आप व्रत को ना तोड़ें.

काले रंग के कपड़े ना पहनें- चतुर्थी के दिन या पूजा के दौरान आप काले वस्त्र धारण ना करें. इस दिन पूजा के दौरान आप पीले या सफेद वस्त्र धारण कर सकते हैं| 



सकट चौथ व्रत कैसे करें-

1. चतुर्थी के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.

2. इस दिन व्रतधारी लाल रंग के वस्त्र धारण करें.

3. श्री गणेश की पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर रखें.

4. तत्पश्चात स्वच्छ आसन पर बैठकर भगवान गणेश का पूजन करें.

5. फल, फूल, रौली, मौली, अक्षत, पंचामृत आदि से श्री गणेश को स्नान कराके विधिवत तरीके से पूजा करें.

6. गणेश पूजन के दौरान धूप-दीप आदि से श्री गणेश की आराधना करें.

7. श्री गणेश को फल, तिल से बनी वस्तुओं, लड्‍डू तथा मोदक का भोग लगाएं और प्रार्थना करें कि 'ॐ सिद्ध बुद्धि सहित महागणपति आपको नमस्कार है. नैवेद्य के रूप में मोदक व ऋतु फल आदि अर्पित है.'

8. सायंकाल में व्रतधारी संकष्टी गणेश चतुर्थी की कथा पढ़े अथवा सुनें और सुनाएं.

9. चतुर्थी के दिन व्रत-उपवास रख कर चंद्र दर्शन करके गणेश पूजन करें.

10. तत्पश्चात श्री गणेश की आरती करें.

इस मंत्र का करें जाप- 

विधिवत तरीके से गणेश पूजा करने के बाद गणेश मंत्र 'ॐ गणेशाय नम:' अथवा 'ॐ गं गणपतये नम: का 108 बार अथवा एक माला करें| 

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