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क्या आप जानते हैं सरकार unlimited पैसे क्यों नहीं छापती, जानिये पूरी कहानी

दोस्तों आप भी ये बात जरूर सोचते होगें की सरकार  Unlimited पैसा छापकर सबको अमीर क्यों नहीं कर देती, दोस्तों हमारी जैसी दुनिया के कई देशों में एक बड़ी आबादी गरीबी से जूझ रही है। पोस्टिक खाना, साफ पानी और साफ सफाई जैसी मूलभूत सुविधाये भी इन बेचारो के लिए लेग्जारी हैं, ऐसे में एक सवाल जो सभी के मन में उठता है, वो यें कि सरकारे Unlimited पैसा छाप के अपनी गरीब जनता में क्यों नहीं बांट देती, इससे देश की गरीबी भी मिट जाएगी और नाही कोई बेरोजगारी रहेगी।




अगर आपके दिमाग में भी यह सवाल कभी ना कभी आया हो, तो दोस्तों बता दूं कि इस सवाल का जवाब जानने से पहले हमें एक फार्मूले को समझना होगा। यह फार्मूला सिंपल है, कि किसी भी देश में बनने वाली Goods और सर्विसेस कीमत ही उस देश की Present currency वर्त के बराबर होती है। यानी कि किसी भी देश में जो सामान की कीमत होती है, वह उस देश के Present currency के बराबर मानी जाती है।

मान लीजिये कि सरकार ने खूब सारे पैसे दिए, और सब के पास अब लाखों करोड़ों रुपए आ गए तो अब मार्केट में एक Toothpaste खरीदने के लिए अगर आप जाएंगे, जिसकी कीमत पहले ₹50 थी। तो अब वही दुकानदार आपको वो Toothpaste ₹50 में क्यों देगा।

जहां पहले वो उस पर ₹5 बचाता था। तो अब उस Toothpaste पर ₹5 बचाकर उसका क्या फायदा। क्योंकि दुकानदार के पास तो अब लाखों करोड़ों रुपए आ गए हैं। तो इसीलिए वो दुकानदार उस Toothpaste की कीमत कई गुना बढ़ा देगा और इसी तरह कच्चे माल से लेकर तैयार माल तक सभी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी आएगी और देश में महंगाई आसमान छूने लगेगी। 


कुछ सालों पहले ऐसी ही गलती Zimbabwe ने भी की थी Zimbabwe ने बहुत सारे नोट छाप दिए जिसका नतीजा यह हुआ कि वहां की currency का devaluation हो गया, यानी की currency की किमत तो कम हो गयी, लेकिन वहा सामान की किमत बढती गयी। 

इससे वहां के लोगों को ब्रेड और अंडे जैसी चीजें खरीदने के लिए भी बैग भर भर के नोट लेकर जाना पड़ता था और दोस्तों currency के इसी devaluation के खतरे के चलते देश Unlimited पैसा नहीं छापते हैं| 





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