क्या कुंवारी लड़कियों को भी रखना चाहिए हरियाली तीज का व्रत, क्या होता है लाभ जानिए
श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन पार्वतीजी के पूजन का विधान होता है। सावन में वर्षा से सारा माहौल हरा भरा हो जाता है। इसलिए भी इसको हरियाली तीज कहते है एवं तृतीया तिथि की स्वामी माता गौरी होती हैं। इसलिए इसको गौरी तीज या कजली तीज भी कहते हैं।
उज्जैन के पंडित मनीष शर्मा के अनुसार जिस स्त्री का विवाह के पश्चात प्रथम सावन आया हो उसे ससुराल में नहीं रखा जाता। पकवान बनावकर बेटियों को सिंघारा भेजा जाता है। ससुराल में भी नई वधुओं को वस्त्र, गहने आदि दिए जाते हैं। इसके पश्चात वह मायके आ जाती है एवं नए वस्त्र, गहनों आदि से सुसज्जित हो अपनी सहेलियों के साथ उत्सव मनाती है।
कुंवारी कन्याएं भी कर सकती हैं हरियाली तीज का व्रत
विभिन्न क्षेत्रो में इसे भिन्न-भिन्न प्रकार से मनाया जाता है। सावन में झूले डलते हैं एवं सभी कृष्ण मंदिरों में भगवान के श्रीविग्रहों को हिंडोले में झुलाया जाता है। यह पर्व विशेषकर देवी पार्वतीजी के पूजन के लिए होता है।
कुंवारी कन्याएं मनभावन पति की कामना के लिए इस पूजन को करती हैं एवं विवाहित स्त्राीयां वैवाहिक सुखों के साथ सदा सुहागन बनी रहने के लिए इस व्रत को करती हैं। शिवपुराण में भी वर्णन है कि इस तीज को जो माता पार्वतीजी का व्रत रख उन्हें झूले पर पर बैठाता है, वह कभी भी दुख को प्राप्त नहीं करता।
पुरुष भी रख सकते हैं व्रत
स्त्रीयों के अलावा पुरुष भी इस व्रत को कर सकते हैं। जिनके घर में अत्यधिक क्लेश होता हो एवं जहां पति-पत्नि के मध्य सामंजस्य नहीं हो वह यह व्रत करें तो दांपत्य जीवन सुखमय हो जाता है एवं गृह-क्लेश नहीं होता। सभी प्रकार के सुख संपत्ति की प्राप्ति होती है।
मां पार्वती को चढ़ाएं ये चीजें
इस दिन देवी को जो गाय के दूध से बना घी अर्पण करता है वह समस्त रोगों से मुक्ति पाता है। मधु अर्पण करने से सुदंरता को प्राप्त करता है। शकर का अर्पण करने से संपत्ति को प्राप्त करता है। कच्चा दूध अर्पण करने से पितरों को शांती एवं सुहाग सामग्री अर्पण करने से परिवार से सुख प्राप्त होता है। देवी को दही अर्पण करने से धन की प्राप्ति होती है तथा सदा सुख बना रहता है।


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