अब बस यादों का इतिहास बनकर रह गयी एटलस साइकिल कम्पनी तय हुई कम्पनी बंद होने की तारीख, जानिए वजह
दोस्तों हम आपको जानकरी के लिए बता दें की एटलस कम्पनी की नींव करीब 70 साल पहले देश की राजधानी दिल्ली से 40 किलोमीटर दूर हरियाणा के सोनीपत में हुई थी। 3 जून को कम्पनी ने साहिबाबाद में स्थित अपनी अंतिम फैक्ट्री को भी बंद कर दिया। साथ ही कम्पनी बंद करने की घोषणा कर दी।
वहीं देखा जाये तो कम्पनी ने अभी तक का अपना 70 साल का सफर बहुत ही शानदार तरीके से पूरा किया। एटलस कम्पनी की शुरुआत 1951 में जानकी दास कपूर ने की थी। जिसके बाद कम्पनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक साल के अंदर ही कम्पनी ने 12000 साइकिल बेच डाली साथ ही 25 एकड़ जमीन में फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया था।

इसके साथ ही साल 1958 में कम्पनी ने विदेश में अपना पहला एक्सपोर्ट किया था। एटलस कम्पनी अपने समय की भारत ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी साइकिल कम्पनी बनकर उभरी थी। साथ ही एटलस ने साल 1978 अपनी पहली रेसिंग साईकल का निर्माण किया था।और 1982 में आयोजित हुये दिल्ली एशियन गेम्स में साइकिल के लिये एटलस को आधिकारिक सप्लायर बनाया गया था।कम्पनी में मुश्किल का दौर 2004 से शुरू हुआ। जिसका मुख्य कारण रहा लोगों का बदलता हुआ परिवेश लोग साइकिल की जगह मोटर साइकिल को तरहीज देने लगे जिससे साइकिल की बिक्री कम हो गई साथ ही कई साइकिल निर्माता कम्पनिया अपनी-अपनी नई साइकिले लांच करने लगी। जिससे कॉम्पिटिशन बढ़ गया।
लेकिन बाजार में मांग की कमी के चलते 2014 में मध्यप्रदेश में स्थित कम्पनी की मलनपुर यूनिट को बंद करना पड़ा। जिसके बाद 2018 में सोनीपत यूनिट को बंद करना पड़ा। और अब लास्ट में 2020 में कम्पनी की आखिरी साहिबाबाद यूनिट को भी बंद कर दियाइसी के साथ एटलस कम्पनी का अपना एक युग अब समाप्ति की और बढ़ रहा हैं।

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