प्रवासी मज़दूरों ने खोल दी पोल, कहा-हमसे लिए गए हैं टिकट के पैसे
श्रमिक एक्सप्रेस. लेकिन टिकट के पैसों को लेकर भारी कंफ्यूज़न है. कई राज्य सरकारों का कहना है कि केंद्र यात्रा को पूरी तरह मुफ्त करे. केंद्र का कहना है कि उसने 85 प्रतिशत सब्सिडी दी है, बाकी 15 प्रतिशत राज्य सरकार दे. विपक्ष का भी एक पक्ष है. लेकिन इस सबमें एक और पक्ष है. उन मजदूरों का जो डेढ़ महीने से बेरोजगार हैं, क्या उनसे टिकट के पैसे लिये गए?
करीब 1200 मजदूरों को लेकर सूरत से लेकर एक श्रमिक ट्रेन 4 मई को रवाना हुई. आज तक से जुड़े संजय सिंह राठौर ने इन मजदूरों से बात की. सभी ने यही बताया कि उन्होंने टिकट के पैसे अपनी जेब से दिए हैं. उनमें से किसी को भी मुफ्त में टिकट नहीं दिया गया. उनसे फॉर्म भरवाए गए, इसके बाद पैसे लेकर टिकट उन्हें दिया गया.
धनबाद जाने के लिए ट्रेन में बैठे हेमराज विश्वकर्मा ने बताया,
वहीं टेक्स्टाइल इंडस्ट्री में काम करने वाले एक मजदूर ने बताया कि उसके सेठ ने उसे चार-पांच हजार रुपये दिये हैं. घर जाने के लिए. उसने भी यही कहा कि टिकट के 720 रुपये उसने खुद से दिये हैं. उससे जब कहा गया कि सरकार तो कह रही है कि टिकट के पैसे वो दे रही है, तो उसने सवाल किया- कहां दे रही है?
झारखंड के गिरिडीह के लिए निकले सुरेश कुमार राम ने कहा,
‘720 रुपये लिए और कहा कि एक बोगी में 54 आदमी जाएंगे. सुविधा के नाम पर कुछ नहीं दिया. अगर गवर्नमेंट को यही करना था तो पहले करती. डेढ़ महीना बिठा के फिर बोला कि अब घर जा सकते हो. जो भी राशन-पानी था घर में वो भी खत्म हो गया. जो पैसे थे वो भी खत्म हो गया.’

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