किन्नर की आपबीती सुनकर रो पड़ेगे आप जाने इनकी पूरी सच्चाई
किन्नर होना अपने आप में एक बहुत ही दर्दनाक और उलझनों से भरा हुआ जीवन होता है, बहुत कुछ होने के बावजूद हमारे पास कुछ नहीं होता. कहने को तो हम परिवार में जन्म लेते हैं और परिवार होता भी है, लेकिन उस परिवार के होने न होने से क्या फर्क पड़ता है जो परिवार हमें अपना मानता ही नहीं।
शायद ही कोई रात ऐसी जाती होगी, जब मेरी आंखों में आंसू न आते हों. मैं बहुत ही छोटी-सी उम्र की थी, जब मुझे एहसास हुआ कि मैं दूसरे बच्चों से बहुत अलग हूं. हुआ यूं कि एक बार मेरे ही परिवार के सदस्य ने मेरी बहुत बुरी तरह पिटाई की, वो भी इसलिए कि मैं लड़कियों की तरह क्यों रहती हूं।
जबकि उस उम्र में मुझे ये एहसास ही नहीं था कि लड़का क्या होता है, लड़की क्या होती है और किन्नर क्या होते हैं. मुझे इन सबके बीच के भेद का बिल्कुल भी अन्दाजा नहीं था.
शायद ही कोई रात ऐसी जाती होगी, जब मेरी आंखों में आंसू न आते हों. मैं बहुत ही छोटी-सी उम्र की थी, जब मुझे एहसास हुआ कि मैं दूसरे बच्चों से बहुत अलग हूं. हुआ यूं कि एक बार मेरे ही परिवार के सदस्य ने मेरी बहुत बुरी तरह पिटाई की, वो भी इसलिए कि मैं लड़कियों की तरह क्यों रहती हूं।
जबकि उस उम्र में मुझे ये एहसास ही नहीं था कि लड़का क्या होता है, लड़की क्या होती है और किन्नर क्या होते हैं. मुझे इन सबके बीच के भेद का बिल्कुल भी अन्दाजा नहीं था.


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