भारत ने कोरोना से निपटने की जगाई उम्मीद, भारत पहले भी इन महामारी पर पा चुके है सफलता
दोस्तो आज हम आपको 1994 के बाद आई सभी महामारियों के बारे में बताने वाले हैं जिनसे भारत जंग जीत चुके है।
21वीं सदी में, सार्स पहली गंभीर बीमारी थी जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाली थी. यह एक गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (acute respiratory syndrome) था और सार्स का कारण COVID-19 के समान था, जिसे SARS CoV नाम दिया गया था. यह वायरस लगातार उत्परिवर्तन (mutations) के लिए जाना जाता था और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसी और छींकने के माध्यम से फैलता था।
डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप दोनों ही मच्छर जनित विशिष्ट रोग थे और देश के विभिन्न हिस्सों में पानी के ठहराव ने इन मच्छरों के लिए प्रजनन आधार प्रदान किया. इन्होने पूरे भारत में लोगों को प्रभावित किया था. इन प्रकोपों के कारण देश के कई हिस्से प्रभावित हुए और राष्ट्रीय राजधानी यानी दिल्ली में सबसे अधिक मरीज सामने आए थे।
गुजरात में फरवरी 2009 में बहुत से लोग हेपेटाइटिस बी से संक्रमित थे जो संक्रमित रक्त और अन्य तरल पदार्थों के शरीर में संचरण के कारण फैला था. ऐसा माना जाता है कि गुजरात के स्थानीय डॉक्टरों ने दूषित और इस्तेमाल किए गए सिरिंज का प्रयोग किया था जिसके कारण यह रोग फैला था।
ओडिशा में सितंबर 2014 में पीलिया का प्रकोप देखा गया था और इसका मुख्य कारण दूषित पानी था. रिपोर्टों के अनुसार, पीने के पानी की पाइपलाइनों में गन्दा पानी प्रवेश कर गया जो कि इस बीमारी का कारण बना था।
2014 के अंतिम महीनों के दौरान, H1V1 वायरस की कई रिपोर्टें उठने लगीं. स्वाइन फ्लू एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा वायरस है और 2014 में, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और तेलंगाना वायरस के कारण सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से थे. मार्च 2015 तक कई सार्वजनिक जागरूकता अभियान के बाद भी, देश भर में लगभग 33,000 मामले सामने आए और लगभग 2000 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
मच्छरों के काटने के कारण, 2017 में, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में सैकड़ों बच्चों की मौत हो गयी थी. जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से इन बच्चों की मौत हो गई थी. इन दोनों वायरल संक्रमणों से मस्तिष्क की सूजन होती है, जिसके परिणामस्वरूप शारीरिक विकलांगता होती है और कुछ मामलों में मृत्यु भी हो जाती है।
मई 2018 में, केरल में चमगादड़ों के कारण संक्रमण शुरू हुआ था. वायरस के व्यापक प्रसार के कुछ दिनों के भीतर, राज्य सरकार ने वायरस के प्रसार को कम करने के लिए कई सुरक्षात्मक उपायों को लागू किये था. निवारक उपायों के कारण, जून के महीने तक केरल में इस पर अंकुश लग गया था।
कोरोनावायरस रोग (COVID-19) एक नयी बीमारी है जो 2019 में शुरू हुई थी. इसके संक्रमण के सामान्य संकेतों में श्वसन संबंधी लक्षण, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं. अधिक गंभीर मामलों में, संक्रमण निमोनिया, गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, गुर्दे की विफलता और यहां तक कि मृत्यु का कारण बन सकता है. अब तक इससे 192 देशों में लगभग 14800 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
तो ये थे 1990 के दशक के बाद से भारत में फैले अब तक के प्रमुख प्रकोप. यदि उचित स्वच्छता और संयमित दिनचर्या अपनायी जाये तो इन में से कई रोगों को ठीक किया जा सकता है।
- 2002 - 2004- सार्स
21वीं सदी में, सार्स पहली गंभीर बीमारी थी जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाली थी. यह एक गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (acute respiratory syndrome) था और सार्स का कारण COVID-19 के समान था, जिसे SARS CoV नाम दिया गया था. यह वायरस लगातार उत्परिवर्तन (mutations) के लिए जाना जाता था और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसी और छींकने के माध्यम से फैलता था।
- 2006- डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप (Dengue and Chikungunya Outbreak
डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप दोनों ही मच्छर जनित विशिष्ट रोग थे और देश के विभिन्न हिस्सों में पानी के ठहराव ने इन मच्छरों के लिए प्रजनन आधार प्रदान किया. इन्होने पूरे भारत में लोगों को प्रभावित किया था. इन प्रकोपों के कारण देश के कई हिस्से प्रभावित हुए और राष्ट्रीय राजधानी यानी दिल्ली में सबसे अधिक मरीज सामने आए थे।
- 2009- गुजरात हेपेटाइटिस का प्रकोप (Gujarat Hepatitis Outbreak)
गुजरात में फरवरी 2009 में बहुत से लोग हेपेटाइटिस बी से संक्रमित थे जो संक्रमित रक्त और अन्य तरल पदार्थों के शरीर में संचरण के कारण फैला था. ऐसा माना जाता है कि गुजरात के स्थानीय डॉक्टरों ने दूषित और इस्तेमाल किए गए सिरिंज का प्रयोग किया था जिसके कारण यह रोग फैला था।
- 2014 - 2015- ओडिशा में पीलिया का प्रकोप (Jaundice Outbreak,Odisha)
ओडिशा में सितंबर 2014 में पीलिया का प्रकोप देखा गया था और इसका मुख्य कारण दूषित पानी था. रिपोर्टों के अनुसार, पीने के पानी की पाइपलाइनों में गन्दा पानी प्रवेश कर गया जो कि इस बीमारी का कारण बना था।
- 2014-2015- स्वाइन फ्लू का प्रकोप (Swine flu outbreak)
2014 के अंतिम महीनों के दौरान, H1V1 वायरस की कई रिपोर्टें उठने लगीं. स्वाइन फ्लू एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा वायरस है और 2014 में, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और तेलंगाना वायरस के कारण सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से थे. मार्च 2015 तक कई सार्वजनिक जागरूकता अभियान के बाद भी, देश भर में लगभग 33,000 मामले सामने आए और लगभग 2000 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
- 2017- एन्सेफलाइटिस का प्रकोप (Encephalitis outbreak
मच्छरों के काटने के कारण, 2017 में, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में सैकड़ों बच्चों की मौत हो गयी थी. जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से इन बच्चों की मौत हो गई थी. इन दोनों वायरल संक्रमणों से मस्तिष्क की सूजन होती है, जिसके परिणामस्वरूप शारीरिक विकलांगता होती है और कुछ मामलों में मृत्यु भी हो जाती है।
- 2018- निपाह वायरस का प्रकोप (Nipah Virus out break)
मई 2018 में, केरल में चमगादड़ों के कारण संक्रमण शुरू हुआ था. वायरस के व्यापक प्रसार के कुछ दिनों के भीतर, राज्य सरकार ने वायरस के प्रसार को कम करने के लिए कई सुरक्षात्मक उपायों को लागू किये था. निवारक उपायों के कारण, जून के महीने तक केरल में इस पर अंकुश लग गया था।
- 2019- कोरोना वायरस (Coronavirus)
कोरोनावायरस रोग (COVID-19) एक नयी बीमारी है जो 2019 में शुरू हुई थी. इसके संक्रमण के सामान्य संकेतों में श्वसन संबंधी लक्षण, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं. अधिक गंभीर मामलों में, संक्रमण निमोनिया, गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, गुर्दे की विफलता और यहां तक कि मृत्यु का कारण बन सकता है. अब तक इससे 192 देशों में लगभग 14800 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
तो ये थे 1990 के दशक के बाद से भारत में फैले अब तक के प्रमुख प्रकोप. यदि उचित स्वच्छता और संयमित दिनचर्या अपनायी जाये तो इन में से कई रोगों को ठीक किया जा सकता है।

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