देखिये सन 1900 के दशक से भारत में महामारियों का इतिहास, जानना है जरूरी
ये है सन 1900 के दशक से भारत में महामारियों का इतिहास
दोस्तो वर्तमान में भारत- COVID-19 या कोरोनावायरस महामारी की चपेट में है लेकिन ऐसा नहीं है कि ऐसा भारत में पहली बार हुआ है.दरअसल भारत में महामारियों का इतिहास 1900 के दशक से ही रहा है. आइये जानते है...
1990 के दशक से कई महामारियों के प्रकोप देखे हैं जैसे कि सार्स का प्रकोप, स्वाइन फ्लू का प्रकोप और कोरोना का प्रकोप. लेकिन इनमें कोई भी प्रकोप COVID-19 जैसा व्यापक और घातक नहीं था. यहां, इस लेख में, हम आपको उन प्रमुख प्रकोपों के बारे में बताएंगे जो भारत ने 1990 के दशक से देखे हैं.
महामारी क्या होती है? (What is an Epidemic)
जब किसी रोग का प्रकोप सामान्य की अपेक्षा पहले की अपेक्षा बहुत अधिक होता तो उसे महामारी (epidemic) कहते हैं. महामारी किसी एक स्थान, क्षेत्र या जनसंख्या के भूभाग पर सीमित होती है. यदि कोई बीमारी दूसरे देशों और दूसरे महाद्वीपों में भी फ़ैल जाए तो उसे पैनडेमिक (pandemic) कहते हैं. WHO ने अब कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानी महामारी घोषित कर दिया है.
आसान शब्दों में पैनडेमिक उस बीमारी को कहा जाता है जो एक ही समय दुनिया के अलग-अलग देशों में लोगों में फैल रही हो।
1. 1915 - 1926: इंसेफेलाइटिस लेटार्गिका
इसे सुस्त इंसेफेलाइटिस के रूप में भी जाना जाता है. यह एक पैनडेमिक थी और 1915 -1926 के बीच दुनिया भर में फैल गई थी. एन्सेफलाइटिस; एक तीव्र संक्रामक बीमारी थी जिसका वायरस मानव के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता था।
इस बीमारी की मुख्य विशेषताएं थी- बढ़ती हुई उदासीनता, उनींदापन और सुस्ती. यह नाक और मौखिक स्राव (nasal and oral secretions) से फैलता था. इंसेफेलाइटिस लेथार्गिका यूरोप में अपने महामारी रूप में था लेकिन भारत में इसका प्रभाव इतना अधिक नहीं था।
2. 1918 - 1920: स्पेनिश फ्लू (Spanish Flu)
जबकि दुनिया अभी भी एन्सेफलाइटिस लेथर्जिका से लड़ रही थी, एक नया वायरस फैल गया जिसका नाम था ‘स्पेनिश फ्लू’. यह एवियन इन्फ्लूएंजा के घातक स्ट्रेन के कारण शुरू हुआ और प्रथम विश्व युद्ध के कारण फैल गया था. भारत में, इस बीमारी को वे सैनिक लाये जो प्रथम विश्व युद्ध में लड़ाई लड़ने गये थे।
3. 1961 - 1975- हैजा महामारी
1817 के बाद से, विब्रियो कोलेरा (बैक्टीरिया का एक प्रकार) वैश्विक रूप से हैजा की महामारी का कारण बना. 5 साल की समयावधि के भीतर, यह वायरस एशिया के कुछ हिस्सों में फैल गया जहां से यह बांग्लादेश और भारत तक पहुंचा. कोलकाता में खराब जल संचय प्रणाली ने इस शहर को भारत में हैजा की महामारी का केंद्र बना दिया था।
4. 1968 - 1969- फ्लू महामारी (Flu Pandemic)
1968 में, फ्लू, इन्फ्लूएंजा ए वायरस के H3N2 स्ट्रेन के कारण हांगकांग में फैला और दो महीने के भीतर भारत पहुंच गया. वियतनाम युद्ध के बाद वियतनाम से लौट रहे अमेरिकी सैनिक इस वायरस के शिकार बन गए थे।
5. 1974- चेचक महामारी (Smallpox Epidemic)
चेचक, दो वायरस वेरिएंट में से किसी एक के कारण होता था: वैरियोला मेजर या वेरोला माइनर. रिपोर्टों के अनुसार, विश्व में चेचक के 60% मामले भारत में रिपोर्ट किए गए थे और दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक विषैले थे।
इस खतरनाक स्थिति से छुटकारा पाने के लिए, भारत ने राष्ट्रीय चेचक उन्मूलन कार्यक्रम (NSEP) शुरू किया था, लेकिन यह कार्यक्रम वांछित परिणाम प्राप्त करने में विफल रह था. इस भयावह स्थिति में भारत की मदद करने के लिए, सोवियत संघ के साथ WHO ने भारत को कुछ चिकित्सा सहायता भेजी और मार्च 1977 में भारत चेचक से मुक्त हुआ था।
6. 1994- सूरत में प्लेग (Plague in Surat)
सितंबर 1994 में, न्यूमोनिक प्लेग ने सूरत में दस्तक दी जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग इस शहर को छोड़कर अन्य शहरों में भाग गये जिसके कारण यह भारत के अन्य शहरों में भी फ़ैल गया था।
अफवाहों और गलत इलाज़ की अफवाहों ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया था. लोगों के सामानों की होर्डिग घर में कर ली जिससे अन्य लोगों के सामने खाद्य संकट पैदा हो गया था।
प्लेग का मुख्य कारण; शहर में खुली नालियों, खराब सीवेज प्रणाली आदि थी. हालांकि, सूरत की स्थानीय सरकार ने कचरा साफ किया और नालियों को खोला, और इस प्रकार प्लेग के फैलाव पर नियंत्रण पाया।
दोस्तो वर्तमान में भारत- COVID-19 या कोरोनावायरस महामारी की चपेट में है लेकिन ऐसा नहीं है कि ऐसा भारत में पहली बार हुआ है.दरअसल भारत में महामारियों का इतिहास 1900 के दशक से ही रहा है. आइये जानते है...
1990 के दशक से कई महामारियों के प्रकोप देखे हैं जैसे कि सार्स का प्रकोप, स्वाइन फ्लू का प्रकोप और कोरोना का प्रकोप. लेकिन इनमें कोई भी प्रकोप COVID-19 जैसा व्यापक और घातक नहीं था. यहां, इस लेख में, हम आपको उन प्रमुख प्रकोपों के बारे में बताएंगे जो भारत ने 1990 के दशक से देखे हैं.
महामारी क्या होती है? (What is an Epidemic)
जब किसी रोग का प्रकोप सामान्य की अपेक्षा पहले की अपेक्षा बहुत अधिक होता तो उसे महामारी (epidemic) कहते हैं. महामारी किसी एक स्थान, क्षेत्र या जनसंख्या के भूभाग पर सीमित होती है. यदि कोई बीमारी दूसरे देशों और दूसरे महाद्वीपों में भी फ़ैल जाए तो उसे पैनडेमिक (pandemic) कहते हैं. WHO ने अब कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानी महामारी घोषित कर दिया है.
आसान शब्दों में पैनडेमिक उस बीमारी को कहा जाता है जो एक ही समय दुनिया के अलग-अलग देशों में लोगों में फैल रही हो।
1. 1915 - 1926: इंसेफेलाइटिस लेटार्गिका
इसे सुस्त इंसेफेलाइटिस के रूप में भी जाना जाता है. यह एक पैनडेमिक थी और 1915 -1926 के बीच दुनिया भर में फैल गई थी. एन्सेफलाइटिस; एक तीव्र संक्रामक बीमारी थी जिसका वायरस मानव के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता था।
इस बीमारी की मुख्य विशेषताएं थी- बढ़ती हुई उदासीनता, उनींदापन और सुस्ती. यह नाक और मौखिक स्राव (nasal and oral secretions) से फैलता था. इंसेफेलाइटिस लेथार्गिका यूरोप में अपने महामारी रूप में था लेकिन भारत में इसका प्रभाव इतना अधिक नहीं था।
2. 1918 - 1920: स्पेनिश फ्लू (Spanish Flu)
जबकि दुनिया अभी भी एन्सेफलाइटिस लेथर्जिका से लड़ रही थी, एक नया वायरस फैल गया जिसका नाम था ‘स्पेनिश फ्लू’. यह एवियन इन्फ्लूएंजा के घातक स्ट्रेन के कारण शुरू हुआ और प्रथम विश्व युद्ध के कारण फैल गया था. भारत में, इस बीमारी को वे सैनिक लाये जो प्रथम विश्व युद्ध में लड़ाई लड़ने गये थे।
3. 1961 - 1975- हैजा महामारी
1817 के बाद से, विब्रियो कोलेरा (बैक्टीरिया का एक प्रकार) वैश्विक रूप से हैजा की महामारी का कारण बना. 5 साल की समयावधि के भीतर, यह वायरस एशिया के कुछ हिस्सों में फैल गया जहां से यह बांग्लादेश और भारत तक पहुंचा. कोलकाता में खराब जल संचय प्रणाली ने इस शहर को भारत में हैजा की महामारी का केंद्र बना दिया था।
4. 1968 - 1969- फ्लू महामारी (Flu Pandemic)
1968 में, फ्लू, इन्फ्लूएंजा ए वायरस के H3N2 स्ट्रेन के कारण हांगकांग में फैला और दो महीने के भीतर भारत पहुंच गया. वियतनाम युद्ध के बाद वियतनाम से लौट रहे अमेरिकी सैनिक इस वायरस के शिकार बन गए थे।
5. 1974- चेचक महामारी (Smallpox Epidemic)
चेचक, दो वायरस वेरिएंट में से किसी एक के कारण होता था: वैरियोला मेजर या वेरोला माइनर. रिपोर्टों के अनुसार, विश्व में चेचक के 60% मामले भारत में रिपोर्ट किए गए थे और दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक विषैले थे।
इस खतरनाक स्थिति से छुटकारा पाने के लिए, भारत ने राष्ट्रीय चेचक उन्मूलन कार्यक्रम (NSEP) शुरू किया था, लेकिन यह कार्यक्रम वांछित परिणाम प्राप्त करने में विफल रह था. इस भयावह स्थिति में भारत की मदद करने के लिए, सोवियत संघ के साथ WHO ने भारत को कुछ चिकित्सा सहायता भेजी और मार्च 1977 में भारत चेचक से मुक्त हुआ था।
6. 1994- सूरत में प्लेग (Plague in Surat)
सितंबर 1994 में, न्यूमोनिक प्लेग ने सूरत में दस्तक दी जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग इस शहर को छोड़कर अन्य शहरों में भाग गये जिसके कारण यह भारत के अन्य शहरों में भी फ़ैल गया था।
अफवाहों और गलत इलाज़ की अफवाहों ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया था. लोगों के सामानों की होर्डिग घर में कर ली जिससे अन्य लोगों के सामने खाद्य संकट पैदा हो गया था।
प्लेग का मुख्य कारण; शहर में खुली नालियों, खराब सीवेज प्रणाली आदि थी. हालांकि, सूरत की स्थानीय सरकार ने कचरा साफ किया और नालियों को खोला, और इस प्रकार प्लेग के फैलाव पर नियंत्रण पाया।



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