जापान के PM शिंजो आबे से मिले भारत के PM नरेंद्र मोदी इन मुद्दों पर की बातचीत
दोस्तों हम आपको बता दें खबर के मुताबिक दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति, समृद्धि और विकास में सहयोग के लिए तीसरे देशों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने का ठान लिया है| और इन बड़े मुद्दों पर भी बातचीत की गयी|
1. भारत ने म्यांमार को दिया सहयोग
सूत्रों के अनुसार यह बात भी सामने आई है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने म्यांमार की स्टेट काउंसिलर आंग सान सू की को विद्रोही समूह के खिलाफ सहयोग को लेकर आश्वस्त माना है. पीएम ने कहा कि भारत इस बात को सुनिश्चित करता है कि विद्रोही समूहों को भारत-म्यांमार सीमा पर गतिविधियां संचालित करने की न दी जाएँ|
वही पीएम मोदी ने बीते विवार को आसियान शिखर सम्मेलन से इतर सू की से मुलाकात की. इस दौरान पीएम ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में सामाजिक आर्थिक परियोजनाओं के विस्तार की बात का बयान किया है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मोदी ने बांग्लादेश से विस्थापित लोगों की रखाइन प्रांत में उनके घरों में जल्द, सुरक्षित व स्थायी वापसी पर भी जोर दें रहे है. पीएम ने कहा कि विस्थापितों का उनके घर पहुंचना तीनों पड़ोसी देश भारत, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ किया जा रहा है|
जंहा दोनों नेताओं ने इस बात पर भी पुष्टि की है कि द्विपक्षीय साझेदारी के निरंतर विस्तार के लिए एक स्थिर और शांतिपूर्ण सीमा होना जरुरी है. पीएम ने यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि दोनों देश यह सुनिश्चित करें कि विद्रोही समूहों को सीमावर्ती इलाकों में काम करने की जगह न दी जाएँ|
2. पिछले समझौते में हुआ था नुकसान
वही सूत्रों का कहना है की यूपीए सरकार के दौरान आसियान देशों के लिए 74 फीसदी बाजार को खोला था, लेकिन इंडोनेशिया जैसे अमीर देश ने भारत के लिए सिर्फ 50 फीसदी बाजार जारी किया था|
जिसके साथ ही यूपीए शासनकाल में भारत ने 2007 में भारत-चीन एफटीए को लेकर सहमति जताई थी और चीन के साथ 2011-12 में आरसीईपी समझौते पर वार्ता को लेकर भी अर्जी की थी.
जानकारी के अनुसार भारत के इस फैसले से आरसीईपी देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा 2004 में 7 अरब डॉलर से बढ़कर 2014 में 78 अरब डॉलर हो गया था. इस फैसले से भारत का घरेलू उद्योग अभी तक उभरा नहीं है|
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