पूरी तरह से कर्ज में डूबे हैं भारत के ये तीन राज्य, पता नहीं कब...
देश की सरकार को उस देश की अर्थव्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी ही नहीं होती बल्कि उस देश के अलग अलग राज्यों की अलग अलग फाइनेंस को सम्भालने की बराबर जिम्मेदारी होती है। क्योंकि सभी राज्य मिलकर ही देश की जीडीपी का निर्माण करते हैं।जब किसी राज्य के सामने फाइनेंशियल समस्या आती है तो वह राज्य केन्द्र सरकार से कर्ज लेता है।

1 . महाराष्ट:-महाराष्ट कर्ज में डूबे राज्यों में से प्रथम स्थान पर है।हालांकि यह राज्य भारत में सबसे अमीर है।महाराष्ट्र पर अभी 4 लाख 91 हजार लाख करोड़ का कर्ज है।क्षेत्रफल के हिसाब से यह तृतीय स्थान का सबसे बड़ा राज्य है।और जनसंख्या में मामले में यह दूसरा बड़ा राज्य है।भारत का कुल रेवेन्यू का 40 फीसदी इसी राज्य से आता है।लेकिन महाराष्ट्र का योगदान 15 फीसदी इंडस्ट्रीइयल आउटपुट में भी है।
2. पश्चिम बंगाल:-आजादी के बाद से ही पश्चिम बंगाल स्टेट फूड की डिमांड की अन्य जरूरतों के लिए केंद्र सरकार पर ही निर्भर रहा है।क्योंकि ग्रीन रेबुलेशन को छू कर भी नहीं निकला था।फिर भी 1980 के बाद फूड रेवुलेशन में अच्छा खासा मुनाफा हुआ है।पश्चिम बंगाल की जीडीपी 13.9 लाख करोड़ रुपये है।और इसकी ग्रोथ 19.8 लाख करोड़ रुपये है।इस राज्य पर 393700 करोड़ रुपये का कर्ज है।पश्चिम बंगाल चाय में भारत में दूसरा उत्पादन राज्य है।
3. उत्तरप्रदेश:-उत्तरप्रदेश कर्ज में डूबे राज्यों की सूची में तीसरे स्थान पर है।उत्तरप्रदेश की अर्थव्यवस्था भारत में पाचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।उत्तरप्रदेश की जीडीपी 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये है वहीं राज्य पर 3 लाख 220 करोड़ रुपये का कर्ज है। 1960 के गेहूं और चावल के उन्न्त किस्म के बीजों के विकास से राज्य देश में फूड ग्रीन में सबसे बड़ा उत्पादन करने वाला बन गया था।वही मिनरल्स के मामले में उत्तरप्रदेश पीछे नहीं है सिलिका लाइमस्टोन और कोयला उत्तरप्रदेश में बहुत अच्छी मात्रा में मिलते हैं।

1 . महाराष्ट:-महाराष्ट कर्ज में डूबे राज्यों में से प्रथम स्थान पर है।हालांकि यह राज्य भारत में सबसे अमीर है।महाराष्ट्र पर अभी 4 लाख 91 हजार लाख करोड़ का कर्ज है।क्षेत्रफल के हिसाब से यह तृतीय स्थान का सबसे बड़ा राज्य है।और जनसंख्या में मामले में यह दूसरा बड़ा राज्य है।भारत का कुल रेवेन्यू का 40 फीसदी इसी राज्य से आता है।लेकिन महाराष्ट्र का योगदान 15 फीसदी इंडस्ट्रीइयल आउटपुट में भी है।
2. पश्चिम बंगाल:-आजादी के बाद से ही पश्चिम बंगाल स्टेट फूड की डिमांड की अन्य जरूरतों के लिए केंद्र सरकार पर ही निर्भर रहा है।क्योंकि ग्रीन रेबुलेशन को छू कर भी नहीं निकला था।फिर भी 1980 के बाद फूड रेवुलेशन में अच्छा खासा मुनाफा हुआ है।पश्चिम बंगाल की जीडीपी 13.9 लाख करोड़ रुपये है।और इसकी ग्रोथ 19.8 लाख करोड़ रुपये है।इस राज्य पर 393700 करोड़ रुपये का कर्ज है।पश्चिम बंगाल चाय में भारत में दूसरा उत्पादन राज्य है।
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