बेडरूम में शांति रखने के लिए आज ही अपनाये ये वास्तु टिप्स
कई बार रात में ऐसा महसूस होता है कि अपने बेडरुम में अच्छी नींद नहीं आयी। कई बार सुबह उठने पर भी नींद पूरी नहीं हो पाती है और ताजगी का एहसास नहीं हो पाता है। तो इसका साफ मतलब है कि बेडरुम में नेगेटिव एनर्जी की मात्रा पॉजिटिव एनर्जी से ज्यादा है।
भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार सोते समय सिर उत्तर और पैर दक्षिण दिशा में होना अच्छा नहीं माना गया है। इस स्थिति में सोने न केवल नींद कम आने की शिकायत पाई गई है, बल्कि शारीरिक कमजोरी का आभास भी होता है।
इस दिशा में सोने से सिरदर्द और अनिद्रा की शिकायत रहती है। वास्तुशास्त्र में सोने की सही दिशा पूर्व-पश्चिम मानी गई है। पश्चिम-पूर्व दिशा भी अच्छी मानी गई है।
बेडरुम कभी भी पूरी तरह से क्लोज्ड यानी बंद नहीं होना चाहिए। ताज़ी हवा आने के लिए कमरे में एक उपयुक्त खिड़की अवश्य होनी चाहिए। बेडरुम में झूठे बर्तन बहुत अधिक समय तक रखना अच्छा नहीं माना गया है।
भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार सोते समय सिर उत्तर और पैर दक्षिण दिशा में होना अच्छा नहीं माना गया है। इस स्थिति में सोने न केवल नींद कम आने की शिकायत पाई गई है, बल्कि शारीरिक कमजोरी का आभास भी होता है।
इस दिशा में सोने से सिरदर्द और अनिद्रा की शिकायत रहती है। वास्तुशास्त्र में सोने की सही दिशा पूर्व-पश्चिम मानी गई है। पश्चिम-पूर्व दिशा भी अच्छी मानी गई है।
बेडरुम कभी भी पूरी तरह से क्लोज्ड यानी बंद नहीं होना चाहिए। ताज़ी हवा आने के लिए कमरे में एक उपयुक्त खिड़की अवश्य होनी चाहिए। बेडरुम में झूठे बर्तन बहुत अधिक समय तक रखना अच्छा नहीं माना गया है।
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