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थाइराइड और बावासीर का गारंटी का इलाज, बस अपनाए ये आसन

आज खान पान की समस्या और खुद को टाइम न दे पाने की वजह से कई तरह की समस्या हो जाती है। जिसमे से थायराइड और कब्ज की समस्या आम होती जा रही है। आज हम आपको थाइराइड और बावासीर के लिए 2 ऐसे आसन बताने जा रहें हैं जिसे करने से आपको इन दोनों समस्या से आराम मिलेगा। आइये जानते हैं इनके बारे मे...

सुप्त वज्रासन

वजरासन में बैठ जाएं। पहले दाहिनी कोहनी तथा भुजा और इसके बाद बायी कोहनी और भुजा के सहारे धीरे धीरे पीछे की ओर झुकें, इसके बाद पीठ को धनुषाकार बनाते हुए सिर के ऊपरी भाग को जमीन पर लायें। हाथों को जांघों पर रखें। घुटनो को जमीन के संपर्क में रखने का प्रयाग करें।


यदि आवश्यक हो तो घुटनों को अलग-अलग कर ले। आखरी मे घुटनों को जमीन के सम्पर्क में लानते हुए जाँधों और घुटनो की पेशियों एवं सन्धि-बन्धनों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। अखों को बन्द कर शरीर को शिथिल करें।
अन्तिम स्थिति में गहरा और धीमा श्वसन करें। श्वासलेते हुए कोहनियों और भुजाओं के सहारे विपरीत क्रम से प्रारम्भिक स्थिति में वापस आये।

श्वसन
गहरा और धीमा।

अवधि
  • शारीरिक लाभ के लिए एक मिनट का अभ्यास पर्याप्त है।
  • आध्यात्मिक लाभ के लिए लम्बे समय तक अभ्यास करें।
  • प्रारम्भिक अभ्यासी अन्तिम स्थिति में कुछ क्षणों से आरम्भ कर धीरे धीरे अवधि का विस्तार कर सकते हैं।
सीमायें
सायटिका, स्लिप डिस्क, मेरुदण्ड के निचले भाग के रोग अथवा गर्दन और घुटनों की समस्या वाले लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए। डॉक्टर्स की सलाह लेना न भूलें।

सुप्त वज्रासन के लाभ

  • इससे गर्दन और थायराइड-ग्रंथि की तंत्रिकाओं पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस वजह से ये आसन थायराइड की समस्या मे बेहद लाभकारी है।

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